रविवार, 27 अप्रैल 2014

चलो जवानों,जागो—जागो













चलो जवानों, जागो—जागो।
देश के दुश्मन,भागो—भागो।।
तोपों के गोले,दागो—दागो।
प्रीत बंधी है, धागो—धागो।।

चलो जवानों, जागो—जागो।
आग लगा ना कोई पाए।।
इंसानियत आगे आ जाए।
जाति—धरम पीछे छूट जाए।।

चलो जवानों, जागो—जागो।
भाई—भाई को लड़वाने का।।
उसका सारा भ्रम मिट जाए।
चाहें लाख, मुसीबत आए।।

चलो जवानों, जागो—जागो।
लक्ष्य को अपने,तुम पहचानो।।
मंजिल अपनी छूकर मानो।
विजय मिलेगी,निश्चित जानो।।

चलो जवानों, जागो—जागो।
खून की गर्मी,तन में लाओ।।
तुम अपनी मंजिल को पाओ।
देश को एकता का पाठ पढ़ाओ।।

चलो जवानों, जागो—जागो।
मंजिल मिलेगी,ये तय मानो।।
अपनी ताकत,तुम पहचानो।
एकता की शक्ति,अब तुम जानो।।

चलो जवानों, जागो—जागो।
पीठ दिखाकर, तुम मत भागो।।
रणचंडी से जीत तुम मांगो।
दुश्मन की सीमा को लांघो।।

चलो जवानों, जागो—जागो।
वीरगति जो तुम पाओगे।।
देश को इक संदेश तुम दोगे।
तुम जग में अमर तब होगे।।

चलो जवानों, जागो—जागो।
घर—परिवार का मोह त्यागो।।
रणयज्ञ में खुद को झोंको।
दौड़ो—दौड़ो,भागो—भागो।।

चलो जवानों, जागो—जागो।
मन को अपने फौलाद बनाओ।।
दिल में बदले की आग जलाओ।
तन को अपने खूब तपाओ।।

चलो जवानों, जागो—जागो।
मंजिल अपनी,तुम पाओगे।।
मन में ये उम्मीद रख जाओ।
जाओ—जाओ,जीतकर आओ।।

—अनीश कुमार उपाध्याय

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