रास्ते जो हसीं होते,इमारतों को कौन पूछता।
जिंदगी जो सपाट होती, मंजिल को कौन ढूंढता।।
जीवन की टेढ़ी—मेढ़ी राहें,हर लम्हा है टूटता।
कभी मन बाग—बाग,कभी है वो रुठता।।
जीवन की हर गली, हर मोड़ का।
अपना इक किस्सा होता है।
कभी संकरी गलियां,कभी चौड़ी सड़क मिलती है।
यही जिंदगी है मेरे दोस्त,कभी हंसती,कभी रोती है।।
जीवन की हर राह का,अपना फसाना होता है।
दिल में गम,आंखों में आंसू,फिर भी मुस्कुराना होता है।।
चोट जो लगती दिल पर, कहकहे लगाना होता है।
खुद अंधेरी राहों पर चलकर,उन्हें जगाना होता है।।
दिल पर हर तहरीर लिख,सबको बताना होता है।
अपना दिल रोये लाख मगर,उन्हें हंसाना होता है।।
दिल की हर सच्चाई पर,परदा दिखाना होता है।
खुद लहू की घूंट पीकर भी, खुशी जताना होता है।।
राह—ए—जिंदगी की, क्या बात बतलाउु तुझको।
खुद गम की राहों पर चलकर,तन तपाना होता है।।
कभी हंसते हुए रोना,कभी रोकर मुस्कुराना होता है।
सूरज की उगती लाली देख,दिन का एहसास कराना होता है।।
चांद की शीतल छाया को,रात बताना होता है।
खुद गम दुनिया का लेकर,जिंदगी हसीं जताना होता है।।
यही जीवन की हकीकत,रोकर भी मुस्कुराना होता है।
खुद पथरीली राहों पर चल, उनके लिए फूल बिछाना होता है।।
गम से चूर रहती जिंदगी,उन्हें हूर बनाना रहता है।
खुद लाख मुसीबत झेलकर,उन्हें शउर सिखाना होता है।।
मगरुर—ए—जिंदगी अपनी, वो नशे में चूर है।
हम तबाह—ए—राह पर,वो हमसे बहुत दूर हैं।।
वो सज—संवर रहे, हम धूर—धूर हैं।
मेरे दिल पे चलते खंजर,वो बने नूर हैं।।
इतने बड़े जहां में, अकेले हमहीं मजबूर हैं।
उन्हें चिंता मेरी नहीं,हम जो गम में चूर हैं।।
हम रास्ते उनके,वो मंजिल हैं हमारी।
हम बिखरे संसार में,उनकी आसमान की तैयारी।।
हम चलकर थक गए,वो बुलंदी छू रहे हैं।
वो बसंत बहार के झोंके, हम बहती लू हैं।।
उनका मौसम खुशगवार,अपना गमों का वार है।
उनके पैरों के नीचे फूल,अपनी तो तलवार है।।
मेरा दिल भी अजीब,उन पर पूरा ऐतबार है।
दिल सौ बार जख्मी हुआ,फिर भी यकीं बार—बार है।।
मिल जाए मंजिल मेरी,मुझको ये उम्मीद है।
मेरी जिंदगी में सारे मौसम,उनके लिए सब ईद है।।
हम राह—ए—संसार हैं,वो खड़ी हुई इमारत।
वो बुलंदी आसमान की, हम जमीं की परत।।
—अनीश कुमार उपाध्याय

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